अगर मैं तुमसे पूछूँ कि तुम कमज़ोर क्यों हो? तो शायद तुम्हारे पास कई जवाब होंगे।
मेरे पास पैसे नहीं हैं, मेरे पास Support नहीं है, मेरी किस्मत खराब है, लोग मुझे समझते नहीं, बचपन अच्छा नहीं था लेकिन क्या तुमने कभी खुद से पूछा है…जिसे तुम अपनी कमज़ोरी कह रहे हो, क्या वह सच में तुम्हारी है?
कोई बच्चा जन्म लेते ही कमज़ोर नहीं होता, जब एक बच्चा जन्म लेता है उसे नहीं पता कि वह अमीर है या गरीब, सुंदर है या साधारण, होशियार है या नहीं। वह सिर्फ़ जीवन जीता है फिर धीरे-धीरे समाज उसे बताना शुरू करता है कि तुम इससे कम हो…, देखो, वो तुमसे बेहतर है, तुमसे नहीं होगा…और एक दिन…वह इन आवाज़ों को अपनी आवाज़ समझ बैठता है।
सबसे बड़ा झूठ कौन-सा है? दुनिया का सबसे ख़तरनाक झूठ यह नहीं कि…तुम असफल हो। सबसे बड़ा झूठ यह है कि तुम इतने ही हो। यानी…तुम्हारी पहचान तुम्हारे अंकों से है,तुम्हारी पहचान तुम्हारी नौकरी से है, तुम्हारी पहचान तुम्हारे चेहरे से है और हम बिना सोचे मान लेते हैं। ज़रा सोचिए अगर किसी शेर के बच्चे को बचपन से भेड़ों के बीच पाल दिया जाए…तो क्या होगा? वह भी खुद को भेड़ ही समझेगा और वह दहाड़ना भूल जाएगा इसलिए नहीं कि उसके भीतर ताकत नहीं थी…बल्कि इसलिए…क्योंकि उसने कभी खुद को जाना ही नहीं।
हमारी कहानी भी कुछ ऐसी ही है। हमें कमज़ोर किसने बनाया? सच कहूँ…किसी ने नहीं। हाँ…लोगों ने डर दिखाया, तुम्हें तुलना करना सिखाया हैं, असफलता का मज़ाक उड़ाया। लेकिन…उसे सच मानने का निर्णय हमने लिया। आजकल लोग Motivational Videos देखकर कहते हैं कि भाई… Confidence नहीं आता।
लेकिन Confidence आएगा कैसे? तुमने आज तक खुद को जाना ही नहीं। तुम हर दिन दूसरों की ज़िंदगी देखते हो लेकिन पाँच मिनट…अपनी ज़िंदगी को देखने की फुर्सत नहीं। तुम आईने के सामने रोज़ खड़े होते हो लेकिन अपने भीतर कभी खड़े नहीं हुए।
गरीबी, असफलता, अकेलापन नहीं बल्कि असली कमज़ोरी है कि खुद को उस नज़र से देखना, जो दुनिया ने तुम्हें दी है। जिस दिन तुमने अपनी आँखों से खुद को देखना शुरू कर दिया…उसी दिन आधी लड़ाई खत्म हो जाएगी।
क्या तुम्हें पता है डर हमेशा उसी को लगता है अपने बारे में निश्चित नहीं होता। जिसे अपनी कीमत पता है वह तुलना नहीं करता और जिसे अपनी दिशा पता है वह भीड़ से नहीं डरता। और जिसे अपने होने का बोध हो गया…उसे हार भी तोड़ नहीं सकती।
आध्यात्मिकता तुम्हें मज़बूत बनाने नहीं आई बल्कि वह तो बस यह दिखाने आई है कि तुम कभी कमज़ोर थे ही नहीं। कमज़ोर था तुम्हारा विश्वास, तुम्हारी पहचान और वह कहानी, जिसे तुम वर्षों से सच मानते आ रहे हो। अब खुद से एक सवाल पूछो…अगर आज दुनिया का हर इंसान तुम्हारी आलोचना करे..तो क्या तुम बदल जाओगे?
अगर जवाब “हाँ” है तो इसका मतलब तुम अभी भी अपने बारे में दुनिया से पूछ रहे हो खुद से नहीं।
निष्कर्ष –
जिस दिन तुमने दूसरों की राय को अपनी पहचान बनाना छोड़ दिया उसी दिन तुम्हारी ताकत लौटनी शुरू हो जाएगी। याद रखिए पेड़ इसलिए मज़बूत नहीं होता कि हवा नहीं चलती बल्कि वह इसलिए मज़बूत होता है क्योंकि उसकी जड़ें ज़मीन में होती हैं। तुम्हारी जड़ तुम्हारी चेतना है। और जिस इंसान की जड़ चेतना में हो उसे दुनिया की कोई आँधी ज़्यादा देर तक हिला नहीं सकती।
