हम वासना के कंट्रोल में क्यों आ जाते हैं?
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हम वासना के कंट्रोल में क्यों आ जाते हैं?

अगर मैं तुमसे पूछूँ तुम अपने मन के मालिक हो? शायद तुम तुरंत कहोगे हाँ। लेकिन अगर तुम्हारा मन सच में तुम्हारे नियंत्रण में है तो फिर एक ग़लत विचार को रोक क्यों नहीं पाते? एक अश्लील तस्वीर देखकर बार-बार उसी ओर क्यों खिंच जाते हो? एक बार छोड़ने का फैसला करने के बाद भी…

हम खुद को कमज़ोर क्यों समझते हैं?

हम खुद को कमज़ोर क्यों समझते हैं?

अगर मैं तुमसे पूछूँ कि तुम कमज़ोर क्यों हो? तो शायद तुम्हारे पास कई जवाब होंगे। मेरे पास पैसे नहीं हैं, मेरे पास Support नहीं है, मेरी किस्मत खराब है, लोग मुझे समझते नहीं, बचपन अच्छा नहीं था लेकिन क्या तुमने कभी खुद से पूछा है…जिसे तुम अपनी कमज़ोरी कह रहे हो, क्या वह सच…

क्या तुम अपने मन हो… या मन के ग़ुलाम ?

क्या तुम अपने मन हो… या मन के ग़ुलाम ?

सुबह आँख खुलते ही…क्या कभी तुमने देखा है कि सबसे पहले निर्णय कौन लेता है? तुम…या…तुम्हारा मन?  मन कहता है…कि आज मत उठो…और तुम रुक भी जाते हो और फिर मन कहता है…कि आज पढ़ाई का मन नहीं है..और तुम किताब बंद कर देते हो, मन कहता है…कि चलो, थोड़ा और मोबाइल चला लेते हैं…और…

अगर तुम कमजोर नहीं हो… तो फिर डरता कौन है?

अगर तुम कमजोर नहीं हो… तो फिर डरता कौन है?

तुम कहते हो कि मुझे डर लगता है लेकिन कभी रुककर यह पूछा है…असल में डरता कौन है?  क्या सच में तुम डरते हो… या तुम्हारे मन ने तुम्हारे बारे में जो कहानी बना रखी है, वह डरती है? हममें से ज़्यादातर लोग किसी घटना से नहीं डरते। हम उस कहानी से डरते हैं, जो…

हम शरीर से आगे क्यों नहीं बढ़ पाते ?

हम शरीर से आगे क्यों नहीं बढ़ पाते ?

क्या सचमुच हम इंसान हैं… या सिर्फ़ एक शरीर?   सुबह उठते ही सबसे पहले क्या याद आता है? आज क्या पहनना है, लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे, चेहरा कैसा लग रहा है, पैसे कितने कमाने हैं और रात तक पहुँचते-पहुँचते पूरा दिन इसी शरीर की इच्छाओं को पूरा करने में बीत जाता है। फिर…

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